श्री कृष्ण के 108 नाम
श्री कृष्ण के नाम जाप करने से जीवन के सभी क्लेश मीट जाते है और शुख- शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है ।
भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम (अष्टोत्तर शतनामावली) इस प्रकार हैं:
- ॐ श्रीकृष्णाय नमः – जो सबका कल्याण करते हैं।
- ॐ कमलानाथाय नमः – जो देवी लक्ष्मी के स्वामी हैं।
- ॐ वासुदेवाय नमः – जो वासुदेव के पुत्र हैं।
- ॐ सनातनाय नमः – जो शाश्वत और अविनाशी हैं।
- ॐ वासुदेवात्मजाय नमः – जो वासुदेव के पुत्र हैं।
- ॐ पुण्याय नमः – जो परम पवित्र हैं।
- ॐ लीलामानुष विग्रहाय नमः – जो मनुष्य रूप में लीला करते हैं।
- ॐ श्रीवत्स कौस्तुभधराय नमः – जो अपने वक्ष पर श्रीवत्स और कौस्तुभ मणि धारण करते हैं।
- ॐ यशोदा वत्सलाय नमः – जो यशोदा के प्रिय बालक हैं।
- ॐ हरये नमः – जो कष्टों को हरते हैं।
- ॐ चतुर्भुजात्त चक्रासि गदा शङ्खाद्युधाय नमः – जो चार भुजाओं में चक्र, तलवार, गदा और शंख जैसे आयुध धारण करते हैं।
- ॐ देवकीनन्दनाय नमः – जो देवकी के पुत्र हैं।
- ॐ श्रीशाय नमः – जो लक्ष्मी के स्वामी हैं।
- ॐ नन्दगोप प्रियात्मजाय नमः – जो नन्द के प्रिय पुत्र हैं।
- ॐ यमुनावेग संहारिणे नमः – जिन्होंने यमुना के वेग को रोका।
- ॐ बलभद्र प्रियानुजाय नमः – जो बलभद्र (बलराम) के छोटे भाई हैं।
- ॐ पूतना जीवितहराय नमः – जिन्होंने पूतना का वध किया।
- ॐ शकटासुर भञ्जनाय नमः – जिन्होंने शकटासुर का वध किया।
- ॐ नन्द व्रज जनान्दिने नमः – जिन्होंने नंद और व्रज के लोगों को आनंद दिया।
- ॐ सच्चिदानन्द विग्रहाय नमः – जो सत्य, चेतना और आनंद का स्वरूप हैं।
- ॐ नवनीता विलिप्ताङ्गाय नमः – जिनका शरीर मक्खन से लिपटा हुआ था।
- ॐ नवनीत नवनीताय नमः – जो नया मक्खन पसंद करते हैं।
- ॐ अनघाय नमः – जो निष्पाप हैं।
- ॐ नवनीता नवनाय नमः – जो हर दिन नया मक्खन खाते हैं।
- ॐ मुचुकुन्द प्रसादकाय नमः – जिन्होंने मुचुकुन्द को वरदान दिया।
- ॐ षोडश स्त्री सहस्रेशाय नमः – जो सोलह हजार स्त्रियों के स्वामी हैं।
- ॐ त्रिभंगिने नमः – जो तीन जगह से मुड़े हुए हैं (त्रिशूलधारी)।
- ॐ मधुराकृतये नमः – जिनकी आकृति मधुर है।
- ॐ शुकवागमृताब्धिन्दवे नमः – जो शुकदेव के अमृत वचन रूपी समुद्र के चंद्रमा हैं।
- ॐ गोविन्दाय नमः – जो इंद्रियों को जीतते हैं या गायों के रक्षक हैं।
- ॐ योगिनां पतये नमः – जो योगियों के स्वामी हैं।
- ॐ वत्स वाट चारिणे नमः – जो बछड़ों के साथ घूमते हैं।
- ॐ अनन्ताय नमः – जिनका कोई अंत नहीं है।
- ॐ धेनुकासुर भञ्जनाय नमः – जिन्होंने धेनुकासुर का वध किया।
- ॐ तृणीकृता तृणावर्तय नमः – जिन्होंने तृणावर्त राक्षस का वध किया।
- ॐ यमलार्जुन भञ्जनाय नमः – जिन्होंने यमलार्जुन के वृक्षों को तोड़ा।
- ॐ उत्ताल ताल भेत्रे नमः – जिन्होंने सात ताल के वृक्षों को भेदा।
- ॐ गोप गोपीश्वराय नमः – जो गोप-गोपियों के ईश्वर हैं।
- ॐ योगिने नमः – जो योगी हैं।
- ॐ कोटि सूर्य समप्रभाय नमः – जो करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी हैं।
- ॐ इलापतये नमः – जो पृथ्वी के स्वामी हैं।
- ॐ परंज्योतिषे नमः – जो परम ज्योति हैं।
- ॐ यादवेंद्राय नमः – जो यादवों के राजा हैं।
- ॐ यदूद्वहाय नमः – जो यदुवंश के शिरोमणि हैं।
- ॐ वनमालिने नमः – जो वन के फूलों की माला पहनते हैं।
- ॐ पीतवासिसे नमः – जो पीले वस्त्र पहनते हैं।
- ॐ पारिजातापहारकाय नमः – जो पारिजात वृक्ष को स्वर्ग से लाए।
- ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः – जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठाया।
- ॐ गोपालाय नमः – जो गायों के पालक हैं।
- ॐ सर्वपालकाय नमः – जो सबका पालन करने वाले हैं।
- ॐ अजाय नमः – जिनका जन्म नहीं होता।
- ॐ निरंजनाय नमः – जो निष्कलंक हैं।
- ॐ कामजनकाय नमः – जो प्रेम के जनक हैं।
- ॐ कञ्जलोचनाय नमः – जिनकी आंखें कमल के समान हैं।
- ॐ मधुघ्ने नमः – जिन्होंने मधु नामक दैत्य का वध किया।
- ॐ मथुरानाथाय नमः – जो मथुरा के नाथ हैं।
- ॐ द्वारकानायकय नमः – जो द्वारका के नायक हैं।
- ॐ बलिने नमः – जो अत्यंत शक्तिशाली हैं।
- ॐ वृंदावनन्तसंचारिणे नमः – जो वृन्दावन में विचरण करते हैं।
- ॐ तुलाभार सहनाय नमः – जो तुलाभार को सहते हैं।
- ॐ वसुदेवप्रियाय नमः – जो वासुदेव के प्रिय हैं।
- ॐ नन्द प्रियाय नमः – जो नन्द के प्रिय हैं।
- ॐ यदुप्रियाय नमः – जो यदुवंश के प्रिय हैं।
- ॐ गोपीमनोहारिणे नमः – जो गोपियों के मन को हरते हैं।
- ॐ कृष्णविलासकृते नमः – जो कृष्ण लीलाएँ करते हैं।
- ॐ कंसारातिघ्नाय नमः – जिन्होंने कंस का वध किया।
- ॐ मुष्टिकघ्नाय नमः – जिन्होंने मुष्टिक का वध किया।
- ॐ चाणूरहन्त्रे नमः – जिन्होंने चाणूर का वध किया।
- ॐ कुवलयापीडहन्त्रे नमः – जिन्होंने कुवलयापीड हाथी का वध किया।
- ॐ गोवर्धनधराय नमः – जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को धारण किया।
- ॐ मधुसूदनाय नमः – जिन्होंने मधु नामक दैत्य का वध किया।
- ॐ केशिहन्त्रे नमः – जिन्होंने केशि राक्षस का वध किया।
- ॐ पूतनानिषूदनाय नमः – जिन्होंने पूतना का वध किया।
- ॐ पूतना जीवितहरिणे नमः – जिन्होंने पूतना के प्राण हरे।
- ॐ शकटभञ्जनाय नमः – जिन्होंने शकट का भंजन किया।
- ॐ यमुनाकर्षणाय नमः – जिन्होंने यमुना को अपनी ओर आकर्षित किया।
- ॐ ब्रह्महर्त्रे नमः – जो ब्रह्म का हरण करते हैं।
- ॐ दामबन्धनाय नमः – जिन्हें रस्सी से बांधा गया।
- ॐ ब्रह्ममोहनकृते नमः – जिन्होंने ब्रह्मा का मोह दूर किया।
- ॐ गोवर्धनधराय नमः – जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को धारण किया।
- ॐ कंसच्छिद्रे नमः – जिन्होंने कंस को समाप्त किया।
- ॐ गोपतिसुताय नमः – जो गायों के पुत्र हैं।
- ॐ गोकुलवासिसे नमः – जो गोकुल में निवास करते हैं।
- ॐ कालियार्दनाय नमः – जिन्होंने कालिया नाग का मर्दन किया।
- ॐ गोवर्धनोद्धारकाय नमः – जो गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले हैं।
- ॐ पूतनाशनाय नमः – जो पूतना का नाश करते हैं।
- ॐ शकटार्दनाय नमः – जो शकट का मर्दन करते हैं।
- ॐ तृणावर्तानाय नमः – जो तृणावर्त को मारते हैं।
- ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः – जो यमलार्जुन का भंजन करते हैं।
- ॐ कालियामर्दनकृते नमः – जो कालिया का मर्दन करते हैं।
- ॐ पूतनामर्दनकृते नमः – जो पूतना का मर्दन करते हैं।
- ॐ मुष्टिकावधनाय नमः – जो मुष्टिक का वध करते हैं।
- ॐ चाणूरवधनाय नमः – जो चाणूर का वध करते हैं।
- ॐ कुवलयापीडहन्त्रे नमः – जो कुवलयापीड का वध करते हैं।
- ॐ कंसघ्ने नमः – जो कंस को मारते हैं।
- ॐ महाबलपराक्रमाय नमः – जो महाबलशाली और पराक्रमी हैं।
- ॐ धर्मसंस्थापकाय नमः – जो धर्म की स्थापना करते हैं।
- ॐ अधर्मनाशकाय नमः – जो अधर्म का नाश करते हैं।
- ॐ परमकारुणिकाय नमः – जो परम दयालु हैं।
- ॐ परब्रह्मणे नमः – जो परब्रह्म हैं।
- ॐ परमार्थाय नमः – जो परम उद्देश्य हैं।
- ॐ परमानंदाय नमः – जो परम आनंद हैं।
- ॐ सच्चिदानन्दाय नमः – जो सच्चिदानंद हैं।
- ॐ सर्वलोकेश्वराय नमः – जो सभी लोकों के ईश्वर हैं।
- ॐ सर्वभूतात्मकाय नमः – जो सभी भूतों की आत्मा हैं।
- ॐ सर्वान्तरात्मने नमः – जो सभी के अंतरात्मा हैं।
- ॐ सर्वभावाय नमः – जो सभी भावों के स्वामी हैं।
- ॐ रामोत्तमाय नमः – जो राम में उत्तम हैं।
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