शिवमहिम्नः स्तोत्रम्
शिवमहिम्न स्तोत्र महादेव की महिमा, उनकी अनंत शक्ति और दया का अद्भुत और अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र गन्धर्व पुष्पदन्त द्वारा रचित है, इसमें कुल 43 श्लोक हैं। इसका पाठ करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति धन, यश और सुख…
Read Moreशिव भक्ति में त्रिपुण्ड का महत्त्व एवं शिव भक्तों को त्रिपुण्ड क्यों धारण करना चाहिए ?
शिव भक्तों के लिए त्रिपुण्ड्र लगाने के बहुत ही महत्त्व है , त्रिपुण्ड्र अत्यन्त उत्तम तथा भोग और मोक्षको देनेवाला है। भौंहों के मध्य भाग से लेकर जहाँ- तक भौंहों का अन्त है, उतना बड़ा त्रिपुण्ड्र ललाटमें धारण करना चाहिये। यह भगवान शिव की उपासना एवं वैराग्य…
Read Moreसोलह सोमबार व्रत कथा
एक समय श्री महादेवजी पार्वती के साथ भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में अमरावती नगरी में आए। वहां के राजा ने शिव मंदिर बनवाया था, जो कि अत्यंत भव्य एवं रमणीक तथा मन को शांति पहुंचाने वाला था। भ्रमण करते सम शिव-पार्वती भी वहां ठहर गए। पार्वतीजी ने कहा- हे नाथ!…
Read Moreअमोघ श्री शिव कवच
वह एक अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली शिव स्तोत्र है, जो भगवान महादेव की कृपा और संरक्षण प्रदान करता है।यह कवच भक्त को सभी प्रकार के भय, शत्रु, रोग, ग्रहदोष, और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा देता है। ध्यानम् ॐ नमः शिवाय शान्ताय करालवदनाय च ।नमस्ते कालरूपाय सदा…
Read Moreश्री शिव रूद्राष्टकं
श्री शिव स्तुति में भगवान शिव की महिमा, गुण, और कृपावान स्वरूप की प्रशंसा की जाती है। यह स्तुति शिव पुराण और भजनों में प्रयोग की जाती है और भगवान शिव के भक्तों द्वारा गाई जाती है। यहाँ एक प्रसिद्ध श्री शिव स्तुति का पाठ दिया जा रहा है:…
Read Moreभगवान शिव के 108 नाम
भगवान शिव के 108 नामों का जप करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। इन नामों का नियमित जप करने से जीवन की कठिनाइयाँ, रोग, ग्रह दोष, और अन्य नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। यह विश्वास किया जाता है कि शिव के इन नामों का…
Read Moreशिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, भोले हर शिव ओंकारा।ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ॐ हर हर हर महादेव…॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे।हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ॐ हर हर हर महादेव..॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।तीनों रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ॐ हर हर हर…
Read Moreश्री शिव अथर्वशीर्ष
।श्री गणेशाय नमः। अथर्वशिरसामर्थमनर्थप्रोचवाचकम् ।सर्वाधारमनाधारं स्वमात्रत्रैपदाक्षरम् ॥ ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाभद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभि-र्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥ स्वस्ति न इन्द्रो वॄद्धश्रवाःस्वस्ति नः पूषा…
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