Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
संस्कार

धर्म - आस्था - भक्ति

संस्कार

धर्म - आस्था - भक्ति

  • मुख्य प्रष्ट
  • आराधना
    • देवी आराधना
    • श्री गणेश
    • शिव आराधना
    • श्री विष्णु आराधना
  • नित्य पाठ
    • अथर्वशीर्ष
    • अष्टकम पाठ
    • कवच पाठ
    • स्तोत्रं
  • आरती
  • चालीसा संग्रह
  • मंत्र एवं नाम जाप
  • कथाएं
  • मुख्य प्रष्ट
  • आराधना
    • देवी आराधना
    • श्री गणेश
    • शिव आराधना
    • श्री विष्णु आराधना
  • नित्य पाठ
    • अथर्वशीर्ष
    • अष्टकम पाठ
    • कवच पाठ
    • स्तोत्रं
  • आरती
  • चालीसा संग्रह
  • मंत्र एवं नाम जाप
  • कथाएं
Close

Search

  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Subscribe
अष्टकम पाठशिव आराधना

श्री शिव रूद्राष्टकं

By admin
October 21, 2025 1 Min Read
0

श्री शिव स्तुति में भगवान शिव की महिमा, गुण, और कृपावान स्वरूप की प्रशंसा की जाती है। यह स्तुति शिव पुराण और भजनों में प्रयोग की जाती है और भगवान शिव के भक्तों द्वारा गाई जाती है। यहाँ एक प्रसिद्ध श्री शिव स्तुति का पाठ दिया जा रहा है:

|| नमामीशमीशान निर्वाण रूपं || 
नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्‌ ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्‌ ॥
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्‌ ।
करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम्‌ ॥
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्‌ ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥
चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्‌ ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥
प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम्‌ ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम्‌ ॥
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्‌ ।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम्‌ सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम्‌ ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥
रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।।
 ॥  इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥
इन श्लोकों में भगवान शिव की उपासना और महिमा का वर्णन किया गया है। यह स्तुति भक्तों द्वारा शिव पूजा और ध्यान के समय अथवा भजन के दौरान की जाती है।

Share this content:

Author

admin

Follow Me
Other Articles
Previous

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र

Next

श्री देवी दुर्गा कवच

संस्कार

  • एक श्लोकी रामायण-

भक्ति

  • Uncategorized
  • अथर्वशीर्ष
  • अष्टकम पाठ
  • आरती
  • कथाएं एवं कहानियाँ
  • कवच पाठ
  • चालीसा संग्रह
  • देवी आराधना
  • मंत्र एवं नाम जाप
  • शिव आराधना
  • श्री कृष्ण
  • श्री गणेश
  • श्री राम
  • श्री विष्णु आराधना
  • संस्कार
  • सहस्त्रनाम पाठ
  • स्तोत्रं
  • हनुमान भक्ति
Copyright 2026 — संस्कार . All rights reserved.